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Saturday, May 22, 2010

One wish

को‌ई गाता मैं सो जाता

संस्कृति के विस्त्रित सागर मे
सपनो कि नौका के अंदर
दुख सुख कि लहरों मे उठ गिर
बहता जाता, मैं सो जाता ।

आँखों मे भरकर प्यार अमर
आशीष हथेली मे भरकर
को‌ई मेरा सिर गोदी मे रख
सहलाता, मैं सो जाता ।

मेरे जीवन का खाराजल
मेरे जीवन का हालाहल
को‌ई अपने स्वर मे मधुमय कर
बरसाता मैं सो जाता ।

को‌ई गाता मैं सो जाता
मैं सो जाता
मैं सो जाता

 - हरिवंशराय बच्चन